Tuesday, August 31, 2021

विचार (Thought) बाल दिवस भाषण के लिए विचारोत्तेजक प्रश्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के बारे में बताना चाहिए

विचार (Thought)

 

विचार जीवन में ज्ञान सोच समझ विषय, वस्तु के भावनाओ पर आधारित होता है। सोच समझ से विचार उत्पन्न होता है। विचार से सोच समझ प्रभावित होता है। सोच समझ कर विचार करने से किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने का ज्ञान प्राप्त करने में बहुत सहूलियत होता है। क्योकि ऐसा करने से मन में एकाग्रता का विकास होता है। मन की एकाग्रता जीवन में बहूत कुछ देता है। जो की जीवन के लिए सकारात्मक हो। विचार को कई पहलू से समझ सकते है।

 

बाल दिवस भाषण के लिए विचारोत्तेजक प्रश्न

बाल दिवस पर बच्चो को सबसे पहले डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के बारे में बताना चाहिए। जिनका जन्म ०५ सितम्बर १८८८ को तिरुत्तानी में हुआ था। उनकी मृतु १७ अप्रैल १९७७ चेन्नई में हुआ था। मुख्या विषय जो बाल दिवस पर जिक्र होना चाहिए। बाल दिवस क्यों मनाया जाता है? बाल दिवस का महत्त्व क्या है? डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी कौन थे? डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी अध्यापक होते हुए कैसे वो भारत देश के राष्ट्रपति बने? शिक्षा और ज्ञान का क्या महत्त्व है? शिक्षा और ज्ञान  जीवन में क्या महत्त्व रखता है? जीवन के हर आयाम में शिक्षा के ज्ञान का महत्त्व क्या है? शिक्षा और ज्ञान जीवन के लिए क्यों जरूरी है? जीवन में शिक्षा और ज्ञान के साथ संस्कार का क्या अहेमियत रखता है? माता पिता, बड़े बुजुर्ग, गुरुजनो को क्यों आदर करना चाहिए? भूतकाल से शिक्षा और ज्ञान लेकर वर्त्तमान में कैसा परिवर्तन करना चाहिए और भविष्य की बुनियाद कैसे रखना चाहिए? भविष्य में शिक्षा और ज्ञान का स्तर कैसा हो? शिक्षा और ज्ञान कैसे मनुष्य के एकजुटता को बढाता है? शिक्षा और ज्ञान के द्वारा लोग कैसे महान बने? कार्य ब्यवस्था के क्षेत्र में शिक्षा और ज्ञान का क्या महत्त्व है?    

 

विभिन्न प्रकार की सोच विकसित करने के क्या अवसर हैं?

जीवन में हर सफलता का कारण कोई न कोई असफलता जरूर होता है। ब्यक्ति प्रयास करता है। प्रयास अवसर प्रदान करता है। जब तक ब्यक्ति प्रयास नहीं करेगा तब तक न अवसर मिलेगा न सफलता ही मिलेगा। प्रयास ही सफलता और अवसर की कुंजी है। कोई भी विषय या वस्तु सिर्फ एक बार प्रयास करने से प्राप्त नहीं होता है। हो सकता है सुरुआत में असफलता नहीं मिले पर असफलता दोबारा सफलता के लिए सोच को अवसर भी देता है की प्रयासशील इन्सान आगे सफल हो। सोच को विकसित करना है तो हर उस कार्य के लिए प्रयास करे जिसके बारे में कुछ सोच समझ रखते है। जीवन में सफल होना है तो अपने कार्य और कर्तब्य को जिम्मेदरी से करे। कोई भी कार्य कर्तब्य करने का प्रयास सोच को बढ़ता है। स्वाभाविक है की जब कुछ करते है तो उसके बारे में कोई रूप रेखा तयार करते है। कुछ सोचते है, कुछ समझते है, तब कोई निर्णय पर पहुचाते है। तब कुछ करने के लिए आगे बढ़ते है। जब तक कुछ नया प्रयास नहीं करेंगे तक तक सोच को नया अवसर नहीं मिलेगा। इसलिए विभिन्न प्रकार की सोच विकसित करने के लिए प्रयास से ही अवसर मिलता हैं।





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विचार (Thought) प्रोग्राम राइटिंग के दौरान अपनी तार्किक सोच को कैसे बढ़ाएं

विचार (Thought)


विचार लोगो के बिच होने के साथ साथ स्वयं में भी मन ही मन विचार उत्पन्न होते है। 

जब किसी कार्य या व्यवस्था में व्यस्त रहते है, विचार हमारे कार्य प्रणाली को बना भी सकता है और बिगार भी सकता है। विचार से सदा सचेत रहे और उनकी विचार को हवा दे जो सक्रीय कार्य से जुदा हुआ हो। एकाग्रता में थोडा सा भी अचेतन विचार को बिगाड़ सकता है। अच्छे विचार के लिए अपने कार्य प्रणाली में एकाग्रता से सचेत होकर पूरा ख्याल रखे। विचार सकारात्मक और सक्रिय कार्य के लिए ही होने चाहिए।

 

प्रोग्राम राइटिंग के दौरान अपनी तार्किक सोच को कैसे बढ़ाएं?

प्रोग्राम राइटिंग बेहत संवेदनशील कार्य है। इस में किसी भी प्रकार के कमी की गुंजाइश नहीं होने चाहिए। कुछ कम रह गया तो पृष्ठ का प्रदर्शन ही नहीं होगा। इसलिए प्रोग्राम राइटिंग के दौरान तर्क वितर्क कर के हर प्रकार से असुध्दी को निकाल कर त्रुटी को कम से कम कर के पृष्ठ का प्रदर्शन किया जाता है। प्रोग्राम राइटिंग के दौरान अपनी तार्किक सोच विचार को बढाने के लिए, अपने प्रोग्राम राइटिंग में उभरते सोच विचार को अधिक से अधिक समझने का प्रयास करना चाहिए। हर शब्द के जितना ज्यादा मतलब निकल सकता है उसे प्रोग्राम राइटिंग में उतारने का प्रयास करना चाहिए। प्रोग्रामिंग के दौरान हर उस पहलू का अध्ययन करना चाहिए जो जरूरी है। ज्यादा से ज्यादा अध्ययन करना चाहिए जिससे ज्ञान भी बढेगा साथ में तार्किक सोच में भी विकाश होगा। जब तक कई विषयो का तुलनात्मक अध्ययन नहीं करेंगे तब तक तार्किक सोच को नहीं बढ़ा पाएंगे। जब भी किसी विषय पर अध्ययन कर के प्रोग्राम राइटिंग करे तो उसके हरेक पहलू को कायदे से समझने का प्रयास करे। प्रोग्राम राइटिंग के कई तरीके से समझे विषय की तुल्नातक अध्ययन भी करे। परिणाम मिलाने पर उसके गहराई में छिपे हर पहलू को समझे तो प्रोग्राम राइटिंग के दौरान अपनी तार्किक सोच को बढ़ा सकते है।  

 

रचनात्मक सोच के साथ अलग तरीके से कैसे जिएं?

रचनात्नक सोच विचार जीवन में ख़ुशी और रोमांच के उल्लास को जीवन के रंग को भर देता है। एक तो जीवन में जारी क्रियाकलाप के और उद्देश्य तो होते ही है। जिसमे इन्सान जीवन ब्यतित करता है। रचनात्मक सोच को समझे तो आम जीवन से बहूत कुछ हटकर होता है। इन्सान अपने जीवन को जीता ही है जिस माहौल ब्यवस्था को अपनाकर जीता रहा है, उससे अलग चाहता है। जिसमे जीवन के और रंग को भरा जा सके। रचनात्मक सोच को पूरा करने के लिए प्रयास भी करके कुछ सफलता भी प्राप्त किया जा सकता है। रचनात्मक सोच के साथ जीने के लिए जीवन के तरीके को बदलता होता है। भले जीवन में सब कुछ हर किसी को प्राप्त नहीं होता है। लोग प्रयास तो करते ही है। अपने जीवन में रचनात्मक सोच को स्थापित भी करते है। वास्तविक जीवन से रचात्मक जीवन बहुत अलग होता है। इन्सान को चाहिए की सोचे विचार करे जीवन में पहले से क्या है? वास्तविक जीवन किस तरीके से चल रहा है? रचनात्मक सोच तो जीवन के लिए जरूरी ही है। जब तक इन्सान सोचेगा नहीं समझेगा नहीं तब तक आगे नहीं बढेगा। इसलिए रचनात्मक सोच को हमेशा सकारात्मक बना कर रखे। जीवन जिस तरीके से चल रहा है चलने दे। अपने रचनात्मक सोच विचार के बारे में कल्पना भी करे। अपने इच्छा को कभी भी ब्यर्थ नहीं जाने दे। मन है तो इच्छा होगा ही कभी भी इच्छा पूर्ति न होने पर मन को कभी दुखी नहीं करे। एक कहाबत है समय से पहले और भाग्य से ज्यादा कभी किसी को कुछ नहीं मिलता है। आशा का दामन थामे रखे। जीवन को सकरात्मका बना कर रखे। उम्मीद पर तो पूरी दुनिया काबिज है। इस तरीके से रचनात्मक सोच के साथ जिया जा सकता है।  





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Sunday, August 29, 2021

विचार (Thought) विस्तृत स्पष्टीकरण के साथ सोच से अधिक तपस्या क्यों पसंद हैं विचार हर संभव विषय वस्तु के बारे में कुछ न कुछ क्रिया या प्रतिक्रिया करता है

विचार (Thought)

 

विचार मन में उठाने वाला एक ऐसा क्रिया है जो हर संभव विषय वस्तु के बारे में कुछ न कुछ क्रिया या प्रतिक्रिया करता है। 

मन में उठाने वाले उचित और अनुचित ख्यालो को भी विचार कह सकते है। मन के अभिब्यक्ति को भी विचार कहते है। मन में उठने वाले बात को भी विचार कहते है। किसी को मन ही मन याद करते है वो भी विचार के माध्यम ही बनता है। वह हर समय मन मस्तिष्क में उठाने वाले सवाल जवाब जो स्वयं अपने मन में अविरल चलता रहता है विचार ही है। स्वयं के मन में उठाने वाला शब्द या दूसरो के बारे में अपने मन में उठाने वाला शब्द भी विचार ही है। 

 

विस्तृत स्पष्टीकरण के साथ विचार

विचार मन के सोच और कल्पना के अनुसार ही चरितार्थ होता है। ब्यक्ति जो सोच समझ रखता है, उसके अनुसार मन में कल्पना अपने कर्तब्य या कार्य के प्रति करता है। सोच समझ बाहरी मन से उत्पन्न होता है। जैसा सांसारिक भाव को मन स्वीकार करता है। जो जीवन में हासिल करना चाहता है। उस सांसारिक भाव को अंतर मन में कल्पना के जरिये मन में नवनिर्माण करता है। ताकि विषय वस्तु जीवन में स्थापित हो सके जिससे जीवन के निवाह का नया मार्ग मिले सके। विचार उसी कल्पना के अनुसार परिलक्षित होता है। विचार बहूत कुछ सिखाता भी है। ब्यक्ति अपने विचार के प्रति सजग हो जाए तो कल्पना से निर्मित विषय वस्तु के परिणाम को ही उजागर करते है। बाहरी मन की बात कहे तो क्या सही और क्या गलत जिव्हा बाहरी मन के तौर बोल जाता है। समझ नहीं पते है बाद में परिणाम कुछ अलग निकलता है तो परिणाम में भी विचार आने लग जाते है। उस विचार से भी सजग हो जय तो जो कुछ बिगड़ रहा है या बिगड़ गया है। उसको ठिक करने का रास्ता मिल जाता है। मन लीजिये की कोई नकारात्मक विचार उत्पन्न हो रहा है तो सोचे की नकारात्मकता कहाँ उत्पन्न हुई है। विचार ही ज्ञान दिलाता है। मन कभी कभी ऐसा हो जायेगा की विचार क्यों आ रहे है? मै नहीं चाह रहा हूँ की ऐसा विचार आये तब मन उस विचार से पीछा छुड़ाना चाहता है। विचार से भागना नहीं है, विचार में उत्पन्न हुए सवाल का जवाब खोजना है। परिणाम तब कुछ ऐसा निकलेगा की मन जो प्राप्त करना चाह रहा है। उसमे क्या मुस्किल उत्पन्न होने वाला है? वो दर्शाता है। संघर्ष, करी मेहनत कर के सकारात्मक कार्य और कर्तब्य तो पूरा हो सकता है। नकारात्मक कार्य, नकारात्मक धारना, अनर्गल कार्य को सक्रिय करने से मन मस्तिष्क पर कुथाराघात भी पड़ सकता है। जिसका परिणाम लम्बे समय तक मन के विचार में रह सकता है। जिससे पीछा चुराना बहूत मुस्किल भी पर सकता है, इसलिए विचार हमेशा सकारात्मक ही होना चाहिए               

 

मनुष्य सोच से अधिक तपस्या क्यों पसंद करते हैं?

सोच समझकर से कुछ करे तो ठिक है। सोच बहूत ज्यादा है तो कलपना भी ज्यादा होगा स्वाभाविक है। कल्पना के द्वारा अंतर मन को सोच के अनुसार कार्य और कर्तब्य के लिए प्रेरित किया जाता है। सोच बहूत ज्यादा है और कार्य कुछ नही कर रहे है तो कल्पना निरर्थक की होता रहेगा। सोच बाहरी मन की देन है, कल्पना अंतर मन में होता है। वर्त्तमान समय में सोच बहूत ज्यादा सक्रीय है। क्योकि कार्य ब्यवस्था को सक्रीय करने में प्रतिस्पर्धा का दौर चल रहा है। सब एक दुसरे से आगे निकलना चाह रहे है। स्वाभाविक है की प्रतिस्पर्धा के दौर में सब तो एक जैसा आगे नहीं जायेगा। कोई न कोई तो पीछे जरूर होगा। हो सकता है ऐसे ब्यक्ति सरल हो सांसारिक क्रिया कलाप उनको पसंद न हो, मगर जीवन जीने के लिए ब्यापार, सेवा, कार्य ब्यवस्था में सफल न हो तो अपने जीवन में कुछ परिवर्तन करना उनके लिए उचित लगता है। संसार में सब कोई एक जैसा नहीं होता है। प्रयास में जरूरी नहीं की सबको एक जैसा सफलता मिले। सफलता तो सोच समझ, बुध्दी विवेक, मन, काल्पन, कभी कभी चतुराई, साम, दाम, दंड, भेद सब के मिश्रण से प्राप्त होता है। सिधान्तवादी ब्यक्ति हर रास्ते को नहीं अपनाता है। जो उनके लिए उचित हो वो उसी रास्ते पर चलेंगे।


सिधान्तवादी ब्यक्ति सोच को कम परिणाम पर ज्यादा ध्यान देते है। 

तपस्या योग ध्यान होता ही है। कर्म के रास्ते पर चलना भी एक तपस्या ही है। जीवन के लिए नित्य कर्म होता है जिसमे सब कुछ समाहित होता है। जो जीवन से ज़ुरा हुआ होता है, सोच मिश्रित हो सकता है। कर्म अपने जीवन के सिधान्त पर चलना तपस्या होता है। ऐसे ब्यक्ति सोचने से अच्छा कर्म करना पसंद करते है। कर्म निस्वार्थ भाव होता है। ऐसे ब्यक्ति न सिर्फ अपने लिए बल्कि अपने से जुड़े  लोगो के हित का भी ख्याल रखते है। उनके ख़ुशी में अपना ख़ुशी समझते है। इसलिए ऐसे ब्यक्ति सोच से ज्यादा तपस्या पसंद करते है।


आमतौर पर ब्यक्ति कर्म रूपी तपस्या करे तो जीवन में भले कुछ हो न हो पर आतंरिक ख़ुशी अवस्य मिलता है। 

स्वयं के मन में झाकने से जीवन के परेशानियो से छुटकारा मिल सकता है। जीवन में सबकुछ प्राप्त करना ही ख़ुशी नहीं होता है। सांसारिक भोग विलाश में मनुष्य जीवन के वास्तविक रंग को भूल जाते है। जीवन में सबकुछ होते हुए भी लोग वास्तविक ख़ुशी से कभी कभी दूर हो जाते है। अंतर मन की ख़ुशी ही वास्तविक ख़ुशी है। इसलिए सिधान्तवादी ब्यक्ति सोच से अधिक तपस्या पसंद करते हैं।    

 

आप कैसे पहचानते हैं कि अगर कोई पक्षपाती या स्थिर तरीके से सोच रहा है तो आप बदलाव को कैसे प्रभावित करते हैं?

सोच जब किसी ब्यक्ति विशेष से जुड़ा हो और उसके हित को ध्यान में रख कर कार्य किया जा रहा हो भले वो अनैतिक कार्य ही क्यों न हो वो पक्षपात के दायरे में आता है। स्थिर तरीके के सोच से जो कार्य होता है उसमे स्वयं के साथ साथ अपने से जुड़े लोगो के हित का भी ख्याल रखा जाता है। जिस कार्य के करने से किसी का कोई नुकसान नहीं होता है तो उसको स्थिर सोच कहते है। जीवन में बदलाव को प्रभावित करने के लिए अपने से जुड़े लोगो के हित के बारे में जरूर सोचे। कुछ भी कार्य कर्तब्य करे तो लोगो के मान सम्मान का जरूर ख्याल रखे। कभी किसी की निंदा नहीं करे। स्वयं खुश रहे दूसरो को भी खुश रहने दे। कुछ कार्य निस्वार्थ भाव से भी करे तो जीवन में बदलाव को प्रभावित कर सकते है।       





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Gyaani Mind ज्ञानी माइंड ब्यर्थ का समय बर्बाद नही कर के मैं अपने कार्य और कर्तब्य पर ज्यादा ध्यान देता हूँ अपने जिम्मेवारी को निभाने का प्रयास करता हूँ इसलिए मै खुश हूँ प्रसन्न हूँ आनंदित हूँ

ज्ञानी माइंड (Gyaani Mind)


मन को जब भी समझने का प्रयास करता हूँ। सवाल पर सवाल खड़ा हो जाता है। 

मन कभी ऐसा सोचता है! मन कभी वैसा सोचता है! जितना मन में उतरने का प्रयास करता हूँ। उलझने लग जाता हूँ। ये सोचकर आगे बढ़ता हूँ की क्या जरूरी है और क्या जरूरी नहीं है। जितना तेज मै नहीं हूँ, उससे ज्यादा तेज तो मन होता है। मै ये सोचकर मन का पीछा नहीं करता हू की उससे मै जीत नहीं पाउँगा। जब मै अपने जरूरी क्रिया कलाप को नहीं पूरा कर पता हूँ। जो मै सोचता हूँ वो होता नहीं है और जो नही सोचता हूँ वो हो रहा होता है। तब क्या मै इस मन का पीछा कर के अपने उम्मीद पर खड़ा उतर पाउँगा? सुबह उठकर अपने दिनचर्या को पूरा करने में लग जाता हूँ। नित्य कर्म और काम काज जब आज तक समय पर मेरे पुरे हुए ही नहीं है। तो क्या मन के इच्छा को कभी पूरा कर सकता हूँ। जो चीज सोचता हूँ की आज पूरा कर लू कुछ न कुछ बाकि रह ही जाता है। तो दुसरे दिन ही जा कर पूरा होता है। और कुछ कम को पूरा करने में कई दिन भी लग जाता है। तो क्या मन के इच्छा को कब पूरा करुगा। मै ये सोचकर मन की इच्छा को नहीं हवा देता हूँ की जितनी चादर है उससे ज्यादा पैर क्या फैलाना। कही कुछ उच् नीच हो गया तो मन के मारा मै तो कही फस ही जाऊंगा। ऐसा मै कभी नहीं चाहूँगा की आ बैल मुझे मार। मैं मन की बात वहा तक मानता हूँ जहा तक जायज़ है। मैं वही करता हूँ, जिसके बारे में मुझे पूरी जानकारी और ज्ञान होता है। ज्यादा से ज्यादा प्रयास करता हूँ की नित्य कुछ नया सीखते रहूँ। अछी ज्ञानवर्धक पुस्तके पढना मै अच्छा समझता हूँ। ब्यर्थ का समय बर्बाद नही कर के मैं अपने कार्य और कर्तब्य पर ज्यादा ध्यान देता हूँ। अपने जिम्मेवारी को निभाने का प्रयास करता हूँ। इसलिए मै खुश हूँ, प्रसन्न हूँ, आनंदित हूँ।            

 

 

सुपर चेतन मन प्राप्त करने के लिए कितने महीनों की आवश्यकता होती है?

सुपर चेतन मन प्राप्त करने के लिए समय की नहीं एकाग्रता की आवश्यकता होती है। सुपर चेतन मन को प्राप्त करने के लिए सबसे पहले मन को निर्मल करना होता है। हर घटना के प्रति सजग रहना पड़ता है। ताकि किसी भी प्रकार के भाव का प्रभाव मन पर रंच मात्र भी नही पड़े और मन हमेशा किसी भी स्तिथि या परिस्तिथि में सरल और सजग रहे। मन को ऐसा बनाये की दुःख में न दुःख महशुस हो और सुख में न सुख महशुस हो तो सुपर चेतन मन के सफलता के लिए आगे बढ़ सकते है। मन का भाव जब सजग रहते हुए सरल हो जाता है। तब मन प्रफुल्लित हो कर हर्स और उल्लास से भर जाता है। तब ऐसे ब्यक्ति को चाहे जितना भी सुख या दुःख हो तो कोई एहसास नहीं होता है। मन के भाव में किसी भी प्रकार के परिवर्तन की कोई उम्मित नहीं रहता है। सुपर चेतन मन प्राप्त करने के लिए मन बुध्दी सोच विचार पर पूर्ण नियंत्रण के साथ योग साधना शवासन बहूत जरूरी है। साधना में सहजावस्था प्राप्त कर के अवचेतन मन के माध्यम से सुपर चेतन मन प्राप्त करने के लिए आगे बढ़ा जाता है। अपने मन में झक कर मन के जो भी अन्दर पड़ा हुआ है सब कुछ निकलकर मन को निर्मल किया जाता है। ताकि मन में बाहरी किसी भी प्रकार के भाव का कोई प्रभाव नहीं पड़े। तब साधक मन में नहीं अपने आत्मा में वास करता है। तब निर्मल अवस्था में कोई भाव नहीं होता है। जैसे मन की मृतु हो चुकी हो। फिर साधक के अन्दर अपने शारीर के लिए भी कोई मोह नहीं होता है। मोह समाप्त हो जाने के बाद ही मन को शक्ति प्राप्त होती है। तब मन नहीं होता है मन की शक्ति होता है। इच्छा नहीं होता है इच्छा शक्ति होता है। तब साधक मन के शक्ति के माद्यम से अपना नया निर्माण करता है। जिसमे नकारात्क कोई विषय वस्तु के लिए जगह नहीं होता है। संसार में कल्याण के उद्देश्य से ऐसा प्रयास करे तो सफलता मिल सकता है। किसी विषय वास्तु के प्राप्ति के उद्देश्य करने पर सफलता की उम्मित बहूत कम रहता है। चुकी विषय वस्तु की प्राप्ति मन का भाव है। सुपर चेतन मन प्राप्त करने से मन समाप्त हो जाता है। मन की शक्ति ही रहता है। इच्छा समाप्त हो जाता है। सिर्फ इच्छा शक्ति रह जाता है। फिर से मन का भाव लाने पर सब शक्ति समाप्त होने लग जाते है। इससे बुध्दी भ्रस्त होने का डर रहता है। पागल भी हो सकते है। साधना के माध्यम से सुपर चेतन मन प्राप्त करने के लिए स्वयं अकेले प्रयास कभी नही करे। योग्य जानकर आत्मज्ञानी के निगरानी में ही ऐसा प्रयास करे। 






Saturday, August 28, 2021

प्रेरणा (Inspiration) मन में हरदम कुछ न कुछ खिचड़ी पका रहा होता है पर कभी उस खिचड़ी के स्वाद को भी लेने का प्रयास भी तो करे

प्रेरक (Inspiration) एक सोच है कर्म हमेसा सक्रीय है बहूत कुछ सोचने से अच्छा है कि कुछ करे और कुछ बन के दिखाए 


प्रेरक एक सोच है। कर्म हमेसा सक्रीय है। बहूत कुछ सोचने से अच्छा है कि कुछ करे और कुछ बन के दिखाए। ख्वाबो में घुमाने से अच्छा है की जो स्वप्न देख रहे है, दिन में अच्छा लगता है। पर उस स्वप्न को सच्ची हकीकत में बदने के लिए आगे बढना पड़ता है। बैठकर सोचने से कुछ नहीं होता है। जब तक तन और मन दोनों को सक्रीय नहीं करेंगे तब तक कुछ नहीं होने वाला है। प्रेरक उदहारण किसी से लेना बहूत आसान है। पर प्रेरणा के अनुरूप प्रेरणादायक उदाहरण बन के दिखाए तो किसी  का प्रेरणा कारगर हो। तब प्रेरक उदहारण जीवन में सफल होता है। 


प्रेरणा मन में हरदम कुछ न कुछ खिचड़ी पका रहा होता है। पर कभी उस खिचड़ी के स्वाद को भी लेने का प्रयास भी तो करे। 

आज कुछ स्वाद मिल जाता है तो उम्मीद पर पूरी दुनिया काबिज है। प्रयास से भले कल सफलता कम मिले पर कुछ दिन बाद खिचड़ी को स्वादिस्ट होने से कोई रोक नहीं सकता है। असफलता मन का डर है जो की निराशा को ही उत्पन्न करता है। साहस और प्रयास आशा की किरने है जो निडरता को उत्पन्न करता है। प्रयास स्वाबलंबी है। प्रेरणा मिलाने के बाद स्वाबलंबन कभी रुक नहीं सकता है। जिसने ठाना है वो तो जरूर कर गुजरेगा। तब न परवाह किसी डर का न असफलता का होता है। फिर जीत और सफलता किसी के रोके नहीं रुकेता है। प्रेरणा का यही तो मुख्य प्रभाव होता है।


प्रेरित होता हूँ। ये बात सुनकर की मन के हारे हार है मन के जीते जीत है। 

जब समझ सकारात्मक और स्वाभाविक है तो हारने का सवाल ही क्यों? उससे तो अच्छा है की उसे जीतने का प्रयास किया जाये। कर्महिनता हार के पहचान है। कर्मठता को जितने से कोई रोक नहीं सकता है। भले अध्याय कितना भी कठिन क्यों न हो। कर्मठता की प्रेरणा योग्य व्यक्ति को सफलता से कोई चूका नहीं सकता है। 





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ज्ञान (Knowledge) जीवन के विकाश और उन्नति के लिए अतिआवश्यक है ज्ञान श्रिस्ताचार सिखाता है अदब सिखाता है आचरण सिखाता है व्यवहार सिखाता है

ज्ञान (Knowledge)

विषयों के ज्ञान (Knowledge) के बिना एक अच्छा व्यवहार करने वाला व्यक्ति सफल कैसे हो जाता है?

 

ज्ञान जीवन के विकाश और उन्नति के लिए अतिआवश्यक है ज्ञान श्रिस्ताचार सिखाता है अदब सिखाता है आचरण सिखाता है व्यवहार सिखाता है बातचित करने की कला सिखाता है कोई भी विषय का ज्ञान अपने ज्ञान को बढ़ाने का ही काम करता है ज्ञान प्राप्त करने के लिए विषय एक माध्यम होता है जिससे जीवन में ज्ञान का विकाश होता है

 

जीवन में ज्ञान के प्रभाव से रहन सहन में सृस्ताचार, अदब, आचरण, व्यवहार, सरलता, सहजता, निर्भीकता, जिज्ञासा जैसे महान गुण जीवन में स्थापित होते है जो ब्यक्ति को सफल और निर्भीक बनाता है इसलिए विषयों के ज्ञान के बिना एक अच्छा व्यवहार करने वाला व्यक्ति सफल हो जाता है





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Friday, August 27, 2021

हम ज्ञान (Knowledge) साझा करने के माध्यम से सुधार करने या आगे बढ़ने के लिए क्या कार्रवाई कर सकता हूं?

ज्ञान (Knowledge)

मनुष्य ज्ञान प्राप्त करता है। जीवन के विकाश और उन्नति के लिए साथ में अपने ज्ञान के माध्यम से दूसरो को भी मार्गदर्शन करना चाहिए। जिससे ज्ञान का सही उद्देश्य पूरा हो।

 

हम ज्ञान (Knowledge) साझा करने के माध्यम से सुधार करने या आगे बढ़ने के लिए क्या कार्रवाई कर सकता हूं?

अपने ज्ञान के माध्यम से दूसरो को मदद जरूर करना चाहिए। ज्ञान है तो ज्ञान का प्रसार होना ही चाहिए। जो ब्यक्ति किसी कारण से कोई आभाव में कही फस रहा है। सबसे पहला कारन यही निकलता है की वो किस कारण से फसा रहा है। क्या उसे अपने कार्य या उद्देश्य का पूरा ज्ञान था? यदि नहीं था तभी फास गया है? ऐसे समय में हर ब्यक्ति अपने ज्ञान के माध्यम से उसको मदत कर के उसके ज्ञान के अभाव को दूर कर सके तो बहूत अच्छा है। अच्छा ज्ञान दूसरो को जरूर देना चाहिए। इससे परमात्मा खुश होते है। इससे अपना ज्ञान और बढ़ता है। मन लीजिये की आप ज्ञानी है। कोई ब्यक्ति आपसे कुछ अच्छा सलाह मांगे आया है। तो उसका मदत जरूर करिए।

समाज में ब्याप्त बुराई कलह को समाप्त करने के लिए लोगो को जागरूक कर के अच्छाई के लिए संघर्ष बहूत समाज सेवी संस्था कर रहे है। लोगो को बुराई से बचने के लिए अपने अपने ढंग से प्रचार प्रसार के माध्यम से प्रयास कर रहे है। ज्ञान साझा करने के माध्यम से सुधार करने या आगे बढ़ने के लिए प्रयास तो जरूर करना चाहिए। मन लीजिये की अपने पास कोई जानकारी के अभाव में कुछ बिगड़ रहा है? तो किसी अच्छे जानकर से विचार विमर्श जरूर करना चाहिए। उनके ज्ञान को प्रेरणा बनाकर आगे बढ़ना चाहिए। कोई बच्चा, बुदुर्ग या कोई रास्ता पूछ रहा है। तो सही जानकारी बताइए, यदि जानकारी नहीं मालूम है। तो किसी से पूछकर उनको जरूर मदद करिए। भले उसमे आपका थोडा समय ब्यस्त हो रहा है। तो कोई बात नहीं है। राहगीर को कभी भी सही रास्ता बताइए तभी आपका ज्ञान सफल है। अक्सर देखा गया है। कोई राहगीर पूछता है? तो लोग सीधे बोल देते है। हमें मालूम नहीं ऐसा नहीं। ऐसा नहीं होना चाहिए। यदि वही पर किसी से विचार ले कर राहगीर को मदद कर देते है। तो ज्ञान का वास्तविक उद्देश्य पूरा होता है। ज्ञान सदा दूसरो को मार्ग प्रदर्शन के लिए ही होता है। साथ में यदि किसी को किसी भी प्रकार के जानकारी की आवश्यकता है। तो संभव है तो जरूर मदद करना चाहिए।   







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यूकेजी (Ukg) और केजी (Kg) में प्रवेश के लिए कौन सा ज्ञान (Knowledge) आवश्यक है? भारतीय प्रणाली में ज्ञान की तुलना में प्रमाणपत्र क्यों महत्वपूर्ण हैं?

शिक्षा का ज्ञान  (Knowledge of education)

 

यूकेजी (ukg) और केजी (kg) में प्रवेश के लिए कौन सा ज्ञान (Knowledge) आवश्यक है?

यूकेजी और केजी में प्रवेश के  लिए  बच्चे को अपना नाम अपने माता पिता का नाम बताने आना चाहिए। किताबी किसी भी ज्ञान की आवश्यकता नहीं है। क्योकि पढाई लिखाई की सुरुआत स्कूल से होते है। सिर्फ बच्चे के समझ का अंदाजा लगाया जाता है। क बच्चे को यूकेजी या केजी में प्रवेश लिया जाए। बच्चो को सिर्फ सब्जी की पहचान या फल का पहचान होना चाहिए। घर में उपयोग होने वाले वस्तु के पहचान होने ज़रूरी है। बच्चा कितना साफ़ बोल पाता है। बच्चे का उम्र ३ साल से बड़ा और ४ साल से छोटा है। तो इसके अनुसार से केजी में प्रवेश लिया जाता है। बच्चा यदि पहले से कुछ किताबी ज्ञान घर में पढ़ा है। जैसे A B C D शब्द या 1 2 3 गिनती सिखा है। छोटे साधारण कविता घर में दुसरे बड़े बच्चो से सिखा हो। उम्र ४ साल से बड़ा और ५ साल से छोटा है। यूकेजी में प्रवेश लिया जाता है। यूकेजी और केजी में प्रवेश के लिए इस प्रकार के ज्ञान की आवश्यकता होता है। मेरे हिसाब से बच्चा जब तक ५ साल का न हो उनके ऊपर पढाई का बोझ डालना ठीक नहीं है। आधुनिक सभ्यता बहूत जल्दी बच्चे पर पढाई का बोझ डाल रहा है। हो सके तो जब तक बच्चा यूकेजी या केजी में प्रवेश के पहले किसी भी प्रकार का किताबी ज्ञान का बोझ न डाला जाये। बच्चे मासूम होते है। बच्चे उम्र और सामान्य ज्ञान जो घर के वस्तु के नाम के ज्ञान के हिसाब से यूकेजी या केजी में प्रवेश होते है। न कि किसी किताबी ज्ञान के माध्यम से प्रवेश होते है। इसलिए बच्चे को स्कूल में प्रवेश के पहले किसी भी प्रकार का किताबी ज्ञान का बोझ न डाले। बच्चो को स्कूल जाने के पहले कुछ सिखाना चाह रहे है। तो सामान्य ज्ञान के तौर पर घर के बस्तु के नाम सिखा सकते है। इतने ही यूकेजी और केजी में प्रवेश के लिए ज्ञान आवश्यक है।   

 

काम के संदर्भ में कर्मचारियों को दिए जाने वाले सैद्धांतिक और व्यावहारिक ज्ञान (Knowledge) का अर्थ है

सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक ज्ञान ब्यक्ति को जिम्मेदार बनता है। खास कर के काम के संदर्भ में कर्मचारियों को अपने सिद्धांत और व्यावहार में पक्का होना बहूत जरूरी है। सिद्धांत ब्यक्ति को समय पर अपने काम पर आना सिखाता है। मन लगाकर काम करना। काम के प्रति अपने जिम्मेदारी को समझना। दिए गए कार्य को जिम्मेदारी से करना। समय का खास ख्याल रखना की दिया गया काम अपने समय पर हो। ताकि उद्यमी को किसी भी प्रकार का कोई नुकसान न हो। व्यावहारिक ज्ञान ब्यक्ति को दुसरे कामगार के बिच में समन्वय स्थापित करने में मदद करता है। जिससे किसी भी प्रकार का काम में कोई विवाद उत्पन्न नहीं होता है। भले कामगार हो या उद्यमी दोनो के साथ समन्वय समान रहता है। काम अपने जगह पर है। रहन सहन का तरीका अपने जगह पर है। भले ब्यक्ति काम में कितना ही माहिर क्यों न हो। यदि व्यावहार अच्छा नहीं है। तो वो किसी काम नहीं माना जाता है। उद्यमी के सामने वो किसी काम का नहीं होता है। अक्सर ऐसा देखा गया है। सिध्दांत उसके चरित्र को दर्शाता है। व्यावहार उसके भूमिका को दर्शाता है। इसलिए काम के संदर्भ में कर्मचारियों को दिए जाने वाले सैद्धांतिक और व्यावहारिक ज्ञान बहूत जरूरी है।       

 

भारतीय प्रणाली में ज्ञान (Knowledge) की तुलना में प्रमाणपत्र क्यों महत्वपूर्ण हैं?

ज्ञान की तुलना में प्रमाणपत्र क्यों महत्वपूर्ण हैं? ये सिर्फ भारतीय प्रणाली में नहीं बल्कि पुरे दुनिया में ऐसा ही मत है। कोई भी ब्यक्ति कही काम के तलाश में किसी ब्यावसाई के पास जाता है। अपने बारे में बताता है। ब्यावसाई उससे कुछ पूछ ताछ करता है। पर इतना करने से कैसे कोई ब्यावसाई किसी अनजान ब्यक्ति पर विश्वास कर लेगा। जब तक की वो क्या जनता है? क्या तजुर्बा उसके पास है? कहाँ से आया है? इस ब्यावसाई में आने के पहले क्या कर रहा था? कहाँ कहाँ काम किया है? या नया है। काम पकड़ने के लिए सारा बात झूट तो नहीं बोल रहा है? कुछ भी हो सकता है? भारतीय सुरक्षा प्रणाली भी यही लोगो को समय समय अवगत पर कराता है। किसी भी अनजान लोगो के संपर्क में सोच समझ कर विचार करे। सिर्फ बात पर विश्वास नहीं करे। आये दिन हो रहे चोरी और धोखादारी से जगत विदित है। इसलिए भारतीय प्रणाली में ज्ञान की तुलना में प्रमाणपत्र महत्वपूर्ण है। ब्यक्ति कौन है? नाम पता कहाँ का है? ब्यक्ति कहाँ से है? कितना पढ़ा लिखा है? क्या क्या योग्यता उसके पास है? कौन कौन से काम में माहिर है? उसका सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक ज्ञान कैसा है? सब जानकारी उसके प्रमाणपत्र में अंकित होता है। विद्यालय, महाविद्यालय, प्रतिष्ठान का मोहर और हस्ताक्षर होता है। जो की उसके योग्यता और उस ब्यक्ति को प्रमाणित करता है। 





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Thursday, August 26, 2021

सार्वभौमिक (Universal) मानव व्यवस्था में तकनीकी ज्ञान (Knowledge) का उपयोग करने के तरीके वाणिज्य स्नातक कंप्यूटर साहित्य 1-2 वर्ष के अनुभव

ज्ञान (Knowledge)

 

आधुनिक ब्यवस्था में तकनिकी ज्ञान अतिआवश्यक है। आज कल के समय में कंप्यूटर, लैपटॉप, टैब और मोबाइल के जरिये कार्यालय में काम करना अनिबार्य हो गया। जिसके ज्ञान के बिना अब कुछ संभव नहीं है। इसलिए किसी भी क्षेत्र में अत्याधुनिक इलेक्ट्रोनिक यन्त्र का ज्ञान बहूत जरूरी हो गया है। आने वाला भविष्य में अत्याधुनिक इलेक्ट्रोनिक यन्त्र का ज्ञान ही मानवता हो काम धंदा दे सकता है। इसलिए अत्याधुनिक इलेक्ट्रोनिक यन्त्र का ज्ञान अतिआवश्यक और अनिवार्य है।  

 

सार्वभौमिक (universal) मानव व्यवस्था में तकनीकी ज्ञान (Knowledge) का उपयोग करने के तरीके

ज्ञान मानव जीवन के जरूरी होने के साथ काम काज का भी माध्यम है। ज्यादाकर लोग आज कल के समय में कार्यालय में काम करते है। चाहे किसी भी क्षेत्रे में हो, काम करने का माध्यम अत्याधुनिक इलेक्ट्रोनिक यन्त्र कंप्यूटर, लैपटॉप, टैब और मोबाइल के जरिये ही काम करते है। सार्वभौमिक मानव व्यवस्था  में तकनीकी ज्ञान का उपयोग करना अब आवश्यक हो गया है। कंप्यूटर के जरिये हिसाब किताब रखना, खाता के सभी जानकारी को कंप्यूटर लैपटॉप में एक-एक लेन देन का हिसाब संगणित करना, डिजाईन और काम के प्रदर्शन का कार्यक्रम बनाना। लैपटॉप के जरिये ग्राहकों को प्रदर्शन दिखाना, सामान के खरीदारी के लिए आकर्षित करना। ब्यावासिक प्रतिष्ठान के प्रचार प्रसार के लिए वेबसाइट बनाना। दूर देश में बैठे लोगो को ब्यावासिक प्रतिष्ठान प्रदर्शन दिखाने के लिए वेबसाइट बहूत अच्छा माध्यम है। लैपटॉप, टैब के जरिये ऑनलाइन ब्यवहार और बातचीत करने का सबसे अच्छा माध्यम है। जिसमे गूगल मेल, वाट्स अप्प, टेलीग्राम आदि अप्प के जरिये टैब और मोबाइल से बर्तालाप कर सकते है।  सामाजिक मीडिया  फेसबुक, ट्विटर, इन्स्ताग्राम, यूट्यूब, रेड्दित, मोज, के जरिये सार्वभौमिक मानव व्यवस्था में तकनीकी ज्ञान के जरिये प्रचार प्रसार करते है। मोबाइल मुख्य तौर पर बातचीत करने के लिए किया जाता है। सन्देश भेजने के लिए जाता है। ऑनलाइन और ऑफलाइन, जहा पर ऑनलाइन ब्यवस्था नहीं होते है। वह पर मोबाइल के जरिये बर्तालाप या सन्देश के जरिये लोगो को ब्यावासिक प्रतिष्ठान के बारे में प्रचार प्रसार करते है। जिससे काम धंदा फलता फूलता है। इस तरह से वर्त्तमान में सार्वभौमिक मानव व्यवस्था में तकनीकी ज्ञान का उपयोग करते है।    


मैं मोबाइल के माध्यम से सूक्ष्म कार्य का ज्ञान (Knowledge) कैसे प्राप्त करूं?

आज कल के समय में बहूत अच्छे अच्छे मोबाइल निकल गये है। जिसमे फोटो निकालने के लिए अत्याधुनिक तकनिकी के कैमरा आ चुके है। सूक्ष्म कार्य जो बहूत छोटे होते है। उनको फोटो निकाल कर बड़ा कर के देख सकते है। सूक्ष्म कार्य को पूरा कर सकते है। कोई काम कर रहे है। जिसके बारे में छोए मोटे जानकारी मोबाइल इन्टरनेट के जरिये निकल कर जिसका ज्ञान पहले से मालूम नहीं होता है। उस ज्ञान को पढ़कर काम को पूरा कर सकते है। कोई भी काम इतना आसान नहीं होता है। जितना लोग समझते है। किसी भी काम के गहराई में जाने के बाद ही मालूम पड़ता है। उस कम का आयाम क्या होता है। ये कोई जरूरी नहीं है की मनुष्य को पूरा ज्ञान होता ही है। कही न कही कुछ न कुछ बाकि जरूर रह ही जाता है। जैसे किसी काम का सूक्ष्म अनुभव के लिए कही न कही से ज्ञान और अनुभव का सहारा लेना ही पड़ता है। मौजूदा समय में हर ब्यक्ति के हाथ में कंप्यूटर लैपटॉप साथ में इन्टरनेट मौजूद हो ये जरूरी नहीं है। हर ब्यक्ति के हालत एक जैसे नहीं होते है। पर ज्यादाकर लोगो के हाथ में मोबाइल इन्टरनेट के साथ होते है। जिसमे खोज बिन कर के काम का सूक्ष्म अनुभव प्राप्त कर सकते है। आज के समय में इन्टरनेट पर हर प्रकार का ज्ञान मौजूद होता है। पढ़कर समझकर विडियो देखकर हर कार्य के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते है। इस तरह से मोबाइल के माध्यम से सूक्ष्म कार्य का ज्ञान कैसे प्राप्त कर सकते है।   


वाणिज्य स्नातक कंप्यूटर साहित्य 1-2 वर्ष के अनुभव के साथ अंग्रेजी का अच्छा ज्ञान (Knowledge) आवश्यक

वाणिज्य स्नातक कंप्यूटर साहित्य 1-2 वर्ष के अनुभव के साथ अंग्रेजी का अच्छा ज्ञान होना बहूत आवश्यक है। आज कल के समय में हर कार्य अंग्रेजी भाषा में ही होता है। अंग्रेजी भाषा अंतर रास्ट्रीय भाषा है। कंप्यूटर, लैपटॉप, टैब, मोबाइल सब मुख्य तौर पर मुख्य भाषा अंग्रेजी भाषा में ही चल रहे है। ब्यावासिक प्रतिष्ठान में ज्यादाकर अंग्रेजी भाषा का ही प्रयोग किया जाता है। सहकर्मी भी अंग्रेजी भाषा का ही प्रयोग करते है। इसलिए वाणिज्य स्नातक कंप्यूटर साहित्य 1-2 वर्ष के अनुभव के साथ अंग्रेजी का अच्छा ज्ञान अतिआवश्यक है।





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कनिष्ठ तकनीकी (Technology) सहायक में व्यावसायिक ज्ञान (Knowledge) में किस प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं? हिसाब किताब में सब बहूत जरूरी है

ज्ञान (Knowledge)

 

ज्ञान जीवन में किसी भी क्षेत्र में बहूत जरूरी है। अब तक किसी भी कार्य ब्यवस्था के लिए उचित जानकारी या ज्ञान न हो तो उस उपक्रम को चलाना मुस्किल पड़ जाता है। ब्यापार क्षेत्र में औद्योगिकी पढाई की पूरी जानकारी होनी ही चाहिए। जब तक औद्योगिकी की सही ज्ञान नहीं होगा तब तक कुछ भी संभव नहीं है। जो लोग उत्पादन क्षेत्र में काम कर रहे है। उनको उत्पादन का पूरा ज्ञान होना चाहिए। कौन सा मशीन कैसे चलता है। क्या सामान लगता है। सामान को कैसे तयार किया जाता है। सभी माप और उपकरण के ज्ञान के बाद ही कोई काम संभव है। कोई कारीगर का मुखिया होता है तो उसको कम का पूरा ज्ञान होता है। तभी वो मुखिया बनता है। मुखिया को चाहिए की सभी कारीगर को सही ढंग से चलये। दिए हुए कार्य को समय पर पूरा करने का प्रयास करे। साथ में कामगारों के साथ नम्रता से और हमसाथी बनकर काम करने का अच्छा ज्ञान होना चाहिए।

 

क्या सामान्य (General Knowledge) से अधिक सामान्य ज्ञान (Knowledge) होना बुरा है?

सामान्य से अधिक सामान्य ज्ञान होना कभी बुरा नहीं होता है। ज्ञान स्वयं सकारात्मक है। इसलिए ज्ञान सामान्य हो या सामान्य अधिक या असामान्य ज्ञान, सब ज्ञान ही होता है। कुछ लोग कभी कभी घमंड में आ कर बहूत ज्यादा ज्ञान के घमंड में उसको अपने ज्ञान का घमंड हो जाता है। तो दुसरे लोगो के के बिच सामान्य से अधिक सामान्य ज्ञान होना बुरा ही होता है। ज्ञान सबको होता है। क्या अच्छा है? क्या बुरा है? सबको पता है। इसलिए अत्यधिक ज्ञान का घमंड बुरा ही होता है। लोगो को उसकी मनसा पता चल चल जाता है। लोग उससे दुरी बनाने में लग जाते है। तब सामान्य से अधिक सामान्य ज्ञान होना उसके कोई काम का नहीं होता है। उसके लिए करनी से ज्यादा कथनी का बोध हो जाता है। फिर वो ज्ञान किस काम का होगा।  

 

कनिष्ठ तकनीकी सहायक में व्यावसायिक ज्ञान (Knowledge) में किस प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं?

कनिष्ठ तकनीकी सहायक में व्यावसायिक ज्ञान में सबसे पहले स्नातक या उच्च माध्यमिक होना आवश्यक है। खाते लेखनी बहूत जरूरी है। शोर्ट टाइपिंग, कंप्यूटर ज्ञान, रोजमर्रा के हिसाब का तकनिकी, नकद लेन-देन, उधर सब प्रकार के हिसाब रखने का ज्ञान होना चाहिए। कामगार के हिसाब किताब रखने का ज्ञान होना बहूत जरूरी है। कामगार के रोज का हजारी और लेन-देन का हिसाब रखने का ज्ञान जरूरी है। सबसे जरूरी है बात करने के तरीके का ज्ञान अच्छा होना चाहिए। पढाई लिखाई में जो ज्ञान सीखे है। उसका याद रहना जरूरी है। हिसाब किताब में ये सब बहूत जरूरी है। कनिष्ठ तकनीकी सहायक में व्यावसायिक ज्ञान में इस प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं।




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Wednesday, August 25, 2021

ज्ञान (Knowledge) समाज के लिए क्या सिफारिशें समाज जहा एक संगठन जहा पर लोग आपस के मिलते है समाज में बैठने वाले लोग सकारात्मक सोच के बुद्धिजीवी लोग होते है

ज्ञान (Knowledge) समाज के लिए क्या सिफारिशें हैं?

 

समाज (Society) का मतलब क्या है

पहले ये समझते है। समाज जहा एक संगठन है। जहा पर लोग आपस के मिलते है। समाज में बैठने वाले लोग सकारात्मक सोच के बुद्धिजीवी लोग होते है। वही समाज में बैठते है। जो अछे विचारक हो। जिनके स्वभाव शांत सरल और सजग होते है। कुछ अच्छी बाते करते है। जहा पर हर तबके के लोग पर विचार विमर्स होता है। क्या सही है? क्या गलत है? जो गलत है। उसको कैसे सही करे किस रास्ते से सही करे की वो गलती दूर हो। सबके लिए एक अच्छा माहौल तयार हो।


समाज में ज्ञान (Knowledge) के तौर पर कही किसी के बिच में किसी प्रकार के वाद विवाद होता है 

जब आपस में नहीं सुलझ पता है। तब दोनों में से कोई एक पक्ष समाज के बिच आकर अपना बात रखता है। तब समाज के लोग दोनों पक्ष के लोग को बुलवाकर दोनों पछ के बाते सुनते है। क्या सही है? क्या गलत है? दोनों पक्ष को अवगत कराते है। दोनों पक्ष को सही जानकारी देते है। जिससे चल रहे बात विवाद दूर हो और आगे चल कर भविष्य दोनों के बिच किसी भी प्रकार का कोई परेशानी पैदा नही हो।


समाज के ज्ञान (Knowledge) में ज्यादाकर समाज जाती विशेष पर आधारित होता है 

जहा पर अपने जाती के हर तबके के लोग का भूमिका होता है। समय समय पर समाज के लोग अपनी अपनी बात को रखने के लिए समाज के सब लोगो को बुलाकर जो जरूरी है। सब अपना अपना बात को रखते है। जाती के लोगो के विकाश के लिए, संगठन को मजबूत करने के लिए सब एकजुट हो कर कार्यरत होते है। 


समाज के ज्ञान (Knowledge) में पंचायत को भी एक समाज समझ सकते है 

पंचायती समाज जहा एक क्षेत्र, कसबे, गाँव के सभी लोगो के लिए होता है। उसको पंचायत कहते है। जिसमे सभी तबके के लोगो के लिए सामान अधिकार होता है। इसमे कुछ पद भी होते है। जैसे मुखिया, सरपंच, सभा सदस्य, ग्राम सभा सदस्य इत्यादि। कसबे, गाँव के विकास के लिए पंचायत सरकार से गुहार लगाकर विकाश के कार्य को पूरा करते है। जिसका लाभ कसबे, गाँव के सभी लोगो को मिलता है।

 

ऐसे बहूत से समाज निम्नलिखित है जो अपने अपने क्षेत्र में कार्यरत है।  कुछ मुख्य समाज के नाम    

 

शिकार और सभा समाज।
देहाती समाज।
बागवानी समाज।
कृषि समितियाँ।
औद्योगिक समाज।
उत्तर-औद्योगिक समाज
।   


ज्ञान (Knowledge) शिपिंग में संकायों की भूमिका छात्र ज्ञान शिपिंग में संकायों की भूमिका काम फुल टाइम वर्क या पार्ट टाइम वर्क में उपलब्ध है

ज्ञान (Knowledge) शिपिंग में संकायों की भूमिका

 

छात्र ज्ञान (Knowledge) शिपिंग में संकायों की भूमिका

ज्ञान किसी भी क्षेत्र में बहूत आवश्यक है। शिपिंग कई तरीके से  होते है। शिपिंग में संकायों की भूमिका में छात्र के ज्ञान के लिए बहूत अच्छा मौका है। जो छात्र पढाई लिखाई के साथ शिपिंग का भी कार्य सिखने के लिए कर सकते है।

 

कूरियर शिपिंग (Courier shipping)

कूरियर शिपिंग के तहत पत्र और सामान को घर घर पहुचना ये काम फुल टाइम वर्क या पार्ट टाइम वर्क में उपलब्ध है। फुल टाइम वर्क में आये हुए ग्राहक के पास से पत्र या सामान का बुकिंग लेना, सामान का वजन करना, सामान या पत्र जल्दी भेजना है या सामान्य गति से भेजना है। ग्राहक से पूछना,  सामान के पैकिंग बनान, लेबल टैग लगाना, ग्राहक को बुकिंग का रसीद बनाकर देना। कौन कौन से सामान कौन कौन से एरिया से है उसको अलग अलग सजाकर रखना। ऑफिस में आने वाले सामान को कायदे से रखना। फाइल और कंप्यूटर में सब सामान का एंट्री करना। ग्राहक को फ़ोन कर के बात चित करके जानकारी मुहैया करना। वापस आये हुए सामान को अलग कर के रखना और दुसरे दिन फिर वितरण के लिए भेजना। ग्राहक का पता न मिल पाने पर ग्राहक से फ़ोन पर बात करना। जो सामान का वितरण नहीं होने पर उसको भेजने वाले ग्राहक को वापस भेजना। इस प्रकार के कार्य का छात्र ज्ञान शिपिंग में संकायों की भूमिका होता है। जो छात्र कूरियर शिपिंग में कम करना चाहते है। बाकि अधिक जानकारी के लिए किसी भी कूरियर कंपनी में विचार विमर्श कर सकते है।

 

यातायात शिपिंग (Transport shipping)

यातायात शिपिंग मुख्या तौर पर परिवहन वाहक के जरिये होता है। यातायात शिपिंग में बड़े बड़े वाहन के जरिये सामान एक जगह से दुसे जगह जाते है। सामान एक जिले से दुसरे जिले और अपने राज्य के बाहर वाले जिले स्थान पर जो शिपिंग होता है। उसे यातायात शिपिंग कहते है। यातायात शिपिंग में छात्र ज्ञान शिपिंग में संकायों की भूमिका में कार्यालय में आये हुए ग्राहक से यातायात शिपिंग का बुकिंग लेना। सामान का वजन करवाना। बुकिंग का बिल्टी बनाना। बिल्टी पर सामान का बजन, सामान का मूल्य, सामान का बिल, सामान कहा जाना है। सब विवरण लिखना। वाहन के हिसाब से सामान का चयन करना। सामान के हिसाब से बिल्टी और बिल को एक साथ जोड़कर सजाना। वाहन में सामान को लोड करवाना। सामान के सब कागज पत्री वाहक को देना। यातायात से आये हुए सामान और जाने वाले सामान को अलग अलग रखवाना। ग्राहक को बिल्टी और बिल के हिसाब से पैसा लेना। सामान ग्राहक को वितरण करना। छात्र ज्ञान शिपिंग में संकायों की भूमिका तरह से हो सकता है।

 

अंतररास्ट्रीय शिपिंग (International shipping)

छात्र ज्ञान शिपिंग में संकायों की भूमिका में अंतर रास्ट्रीय शिपिंग में आयत निर्यात दोनो ही कम बहूत महत्वपूर्ण है। निर्यात में सबसे पहके शिपर से ३ पृष्ठ इनवॉइस और पैकिंग लिस्ट लेते है। उसके बाद पोर्ट से एडवांस कार्गो डिक्लेरेशन किया जाता है। कस्टम में रजिस्ट्रेशन करने के लिए चेक लिस्ट तयार किया जाता है। कस्टम से शिपिंग के कस्टम क्लीयरिंग के लिए तारीख लिया जाता है। शिपर को सूचित किया जाता है। कंटेनर बुक किया जाता है। फुल कंटेनर लोडिंग के आधार पर कंटेनर शिपर के जगह पर भेजा जाता है। जब फैक्ट्री स्टफिंग का आदेश शिपर के पास हो तभी कंटेनर शिपर के यहाँ भेजा जाता है। नहीं तो फैक्ट्री स्टफिंग का आदेश शिपर के पास नही होने पर सामान कस्टम क्लीयरिंग पोर्ट पर ही सामान शिपर से मंगवाकर कंटेनर में कस्टम अधिकारी के सामने भरा जाता है। या लुज कंटेनर लोडिंग के आधार पर जब सामान पुरे एक कंटेनर से कम हो तो दुसरे शिपर के सामान के साथ किसी शिपिंग कंटेनर में जगह बुक कर के भेजा जाता है। जिसमे कई शिपर के सामान होते है। शिपर का मतलब निर्यातक होता है। जो सामान भेजने का कम करता है, उसको शिपिंग एजेंट कहा जाता है। लकड़ी के पैकिंग होने पर फ्युमिगेसन सर्टिफिकेट लगाना पड़ता है। सामान के हिसाब से कौन सा सामान किस विभाग से है उसके भी सर्टिफिकेट लेने पड़ते है तभी खरीदार सामान को अपने देश में छुड़ा पता है। कस्टम अधिकारी से सब परिक्षण करेने के बाद दस्तावेज पर हस्ताक्षर और मोहर करवाकर कस्टम अधिकारी के सामने कंटेनर सील करके शिपिंग पोर्ट पर कंटेनर भेजा जाता है। शिपिंग लाइन से सेलिंग होने के बाद सेलिंग डेट डाल कर बिल ऑफ़ लीडिंग के ३ पृष्ठ तयार किया जाता है। जिस शिपिंग लाइन का कंटेनर होता है। उस शिपिंग लाइन से हाउस बिल ऑफ़ लीडिंग और ३ पृष्ठ मास्टर बिल ऑफ़ लीडिंग इनवॉइस, पैकिंग लिस्ट और कस्टम क्लीयरेंस कॉपी के आधार पर शिपिंग लाइन से तयार करबाया जाता है। हाउस बिल ऑफ़ लीडिंग शिपिंग लाइन को जाता है। इनवॉइस, पैकिंग लिस्ट, कस्टम क्लीयरेंस कॉपी, ३ पृष्ठ बिल ऑफ़ लीडिंग के साथ अन्य जरूरी दस्तावेज को शिपर को भेज दिया जाता है। शिपर को सूचित किया जाता है की १ पृष्ठ मास्टर बिल ऑफ़ लीडिंग, इनवॉइस, पैकिंग लिस्ट खरीदार को भेज दे, शिपर के आग्रह पर शिपिंग एजेंट मास्टर बिल ऑफ़ लीडिंग को अपने देश में सरंडर भी कर सकता है। तब कोई भी दस्तावेज खरीदार को भेजना नहीं पड़ता है, सिर्फ इनवॉइस, पैकिंग लिस्ट, और मास्टर बिल ऑफ़ लीडिंग की डिजिटल कॉपी ईमेल से खरीदार को भेजना पड़ता है। इससे वो सामान अपने देश में छुड़ा सकता है। मास्टर बिल ऑफ़ लीडिंग और इनवॉइस पैकिंग लिस्ट की ३ पृष्ठ इसलिए बनता है। पहला मास्टर बिल ऑफ़ लीडिंग, इनवॉइस और पैकिंग लिस्ट खरीदार के के पास जाता है। दूसरा मास्टर बिल ऑफ़ लीडिंग, इनवॉइस और पैकिंग लिस्ट शिपर  को अपने बैंक भेजना पड़ता है। जो एडवांस पेमेंट शिपर  खरीदार से अपने बैंक में लेता है। उस पैसे का बैंक एक सर्टिफिकेट बनाकर शिपर को देता है। जिसे फॉरेन इनवर्ड रेमिटेंस सर्टिफिकेट कहते है। शिपर सब दस्तावेज फॉरेन इनवर्ड रेमिटेंस सर्टिफिकेट, इनवॉइस, पैकिंग लिस्ट, कस्टम क्लीयरेंस कॉपी, दूसरा मास्टर बिल ऑफ़ लीडिंग बैंक को जमा कर देता है। तीसरा पृष्ठ शिपर के पास रहता है उसके खाता के जानकारी के लिए। तब बैंक शिपर को बिल रेगुलाईजेसन सर्टिफिकेट देता है तब निर्यात पूरा होता है।     

ज्ञान के स्रोत में सवाल गजब का तब होता है जब ज्ञान के विकास में वसा किस प्रकार योगदान देता है?

ज्ञान (Knowledge) के विकास में वसा किस प्रकार योगदान देता है?


ज्ञान से जुड़े सवाल गजब का तब होता है जब कुछ ऐसे सवाल उठ जाये की आखिर क्या जवाब दिया जाये। 

ज्ञान के विकाश में प्रश्न शानदार तो तब बनता है जब तक की सोच मस्तिस्क में प्रबल न हो। आखिर वसा ज्ञान के विकाश में किस प्रकार योगदान देता है। मै तो समझता हूँ की ज्ञान की जड़ ही वासा है। मन का भाव, विवेक बुध्दी, कल्पना, सोचना, समझना, सुख, दुःख. हसना, रोना, प्रगति, अवनति, ये सब क्या है? इस सबको किस भाषा से समझेंगे? तो सही उत्तर मिलता है। ज्ञान, सब ज्ञान ही है। महत्त्व, आभास, सम्बेदना, सुखद पल, जैसा जीवन में आगमन या पारगमन होता है। तो मनुष्य को उसका ज्ञान होता  है। ज्ञान को समझा जाये तो ज्ञान का कोई भी परिभाषा आज तक कोई पुरा नहीं कर सका है। ज्ञान अनन्त है। जिसका कोई अंत ही नही है। जिसको कोई नही आज तक समझ पाया। ज्ञान कहा से आया और कहा तक जायेगा। मै तो ज्ञान को एक घटना समझता हूँ। जो स्वत ही घटित होता है। जैसा प्रयास करेंगे वैसा ही फायदा या नुकसान होगा। निर्णय तो मन को लेना होता है। मन को क्या पसंद है। सब तो ज्ञान ही है। जैसा इच्छा होता है। ज्ञान का परिणाम भी वैसा ही होता है। 


ज्ञान (Knowledge) के विकास में वसा कैसे योगदान देता है? 

ज्ञान के अनुसार योग का मतलब जुड़ना होता है। जब कुछ जीवन में जुड़ता है। और कुछ जीवन से दूर जाता है। आना जाना चलता रहता है। और जो रुक जाता है। वो समझ ले की वो उसका अपना घर है। रास्ता कौन दिखाता है? मन, बुध्दी और कल्पना तीन महत्वपूर्ण विकल्प है। मन काल्पना को हवा देता है।, कल्पना का परिणाम बुध्दी पर पड़ता है। बुध्दी मन के अनुरूप होता जाता है। वैसे ही वसा एक तत्व है। मिट्टी तत्व उसका पहचान है। वासा का परिणाम चिकनाहट, मोटापा, चर्बीदार, मेद, उपजाऊ, स्थूल, मोटा ताजा जिसे जो समझ में आये। कोई रोक टोक नहीं है। मन के अनउपयुक्त उर्जा जो मन में पनपते है। जिसका कोई उपयोग नहीं किया जाता है। कल्पना में घटना को घटित होने दिया जाता है। जिनसे हमेशा वेपरवाह रहते है। सोच ऐसी होती है। सब सोचते जाते है। कार्य के नाम पर कुछ नहीं होता है। बस घटना को सोच सोच कर सुख या दुःख महशुस करना होता है। जिसका वास्तविक जीवन में कोई स्थान ही नही होता है, बल्कि उसका कोई उपयोग भी नहीं होता है। घटना मन में घटित होता रहता है। जब सोच से मन पर तबरतोर प्रभाव पड़ता है। जब सोच के प्रभाव से मन तुरंत सुख दुःख को महशुश कर लेता है। तो क्या अनउपयुक्त घटना का प्रभाव शरीर पर नहीं पड़ेगा। चिंता फिक्र में तो शरीर गलकर चिता हो जाता है। ये प्रत्यछ उदहारण है। बहूत लोग ऐसे घटना के ज्ञान को देखते और समझते भी है। अनउपयुक्त घटना का ज्ञान भी इन्ही में से है। जो मन में बस गया अपना घर बना लिया। मनोबल से बहूत लोग सुख दुःख के भाव को कम कर लेते है। किसी को अपने मन के अन्दर क्या चल रहा है। भनक भी नहीं लगने देते है। मन का भाव उस घटना को स्वीकार कर लेता है। तब मन में वेदना कम होता है। बाहर दूसरो को नजर नहीं आता है। ऐसे घटना के बारम्बार होने से वसा तत्व अनउपयुक्त घटना से बढ़ भी सकता है। ज्ञान के विकास में वसा अनउपयुक्त घटना से निर्मित उर्जा को अपने अन्दर ले भी सकता है। ज्ञान के दृष्टी से उर्जा का उपयोग होना चाहिए। उर्जा को एक आयाम से दुसरे आयाम में परिवर्तित किया जा सकता है। उर्जा को कभी भी नस्त नहीं किया जा सकता है। वो कही न कही अनपयुक्त उर्जा असर दिखायेगा ही।

Tuesday, August 24, 2021

ज्ञान (Knowledge) के रमना में संपत्ति वास्तविक सुहावना होना चाहिए ज्ञान के पार्क है तो रमना मन मोहक भी होना चाहिए फूलो के बाग़ में है तो खुशबूदार भी होना चाहिए

ज्ञान (Knowledge) के पार्क में संपत्ति खरीदने के क्या फायदे हैं


ज्ञान (Knowledge) के रमना में संपत्ति वास्तविक है की सुहावना होना चाहिए 

ज्ञान के पार्क है। तो रमना मन मोहक भी होना चाहिए। फूलो के बाग़ में है तो खुशबूदार भी होना चाहिए। फलो के बाग़ में है तो मीठा रसीले भी फल भी खाने को मिलाना चाहिए। बगीचे में पेड़ पौधे झाड़ पतवार होना लाजमी है। दूर से खुबसुरत भी दिखे दिखावा अच्छा होना चाहिए।  बाग़ में बागवान भी होना चाहिए।


ज्ञान (Knowledge) के पार्क में तो सब उपलध है 

ज्ञान के नजरिये से जीवन को देखे तो अच्छा दिखने के लिए सबसे पहले मन, कर्म, वचन से सकारात्मक जरूर होना चाहिए। मन शीतल और मोहक होगा तो खुशबूदार अपने आप हो जायेगा। मन को शीतल करने के लिए जितने भी कूड़ा कड़कत मन में है निकल फेके। नाही तो यही झाड़ और पतवार बन जायेंगे। इसलिए झाड़ और पतवार को हमेशा साफ़ करते रहिये। ताकि ज्ञान के पार्क में पेड़ पौधे ठीक से उग सके। मन की शीतलता ज्ञान को सिचता है। जिससे मन आकर्षक होता है। खुशबूदार फुल कि तरह सबके बिच आकर्षण का केंद्र बनता है। ऐसे ब्यक्ति के ज्ञान, सोच समझ, विवेक बुध्दि से निकले ज्ञान मीठे रसीले फल की तरह उपयुक्त और फायदेमंद ही होते है। ऐसे ज्ञान के पार्क के बागवान निष्ठावान ब्यक्ति ही होते है।


जीवन का ज्ञान (Knowledge) अच्छाई के लिए ही होना चाहिए। 

संसार में हरेक वस्तु को ख़रीदा जा सकता है। प्राकृतिक देन को कभी खरीद नहीं सकते है। ज्ञान, कल्पना, सोच, समझ, बुध्दी विवेक ये सभी प्रकृति के देन है। इसको सजगता, सहजता, नम्रता, स्वभाव से जीवन में स्थापित किया जाता है। संसार का कोई भी कीमत इसका लगा ले और प्राकृतिक गुण को खरीद ले। ऐसा कोई हो तो हमें भी बताये। हम भी बहूत उत्सुक है। ज्ञान रूपी ये गुण अब बाज़ार में मिल रहे है। इसलिए ज्ञान के पार्क में संपत्ति खरीदने का मेरे नजर में कोई सवाल ही नहीं है। पर ज्ञान के पार्क में संपत्ति को अपने जीवन में स्थापित कर सकते है।

मन ज्ञान का प्रवेश द्वार है कल्पना ज्ञान का द्वार है जब तक मन कुछ अपने में नहीं लेगा तब तक कल्पना सार्थक नहीं होगा

ज्ञान (Knowledge) का द्वार या ज्ञान का प्रवेश द्वार जो सही है

मन ज्ञान (Mind Knowledge) का प्रवेश द्वार है 

कल्पना ज्ञान (Imagination Knowledge) का द्वार है 

जब तक मन कुछ अपने में नहीं लेगा। तब तक कल्पना सार्थक नहीं होगा। मन तो अपने अन्दर बहूत कुछ अपने में समेटे रखता है। पर सक्रीय वही होगा जो कल्पना में समां जायेगा। कल्पना मन का विस्तार है। मन पहेली भी रच सकता है। कल्पना संधि विच्छेद तक कर सकता है। द्वार तो मन ही है। उद्गम कल्पना है। जब तक संस्कार और ज्ञान अन्दर नहीं जायेगा। तब तक कल्पना के उद्गम में ज्ञान का आयाम कैसे बनेगा। सार्थकता तो उद्गम तक पहुचना होता है। प्रवेश द्वार के अन्दर जा कर कोई वापस भी आ सकता है। पर उद्गम में विचरण का मौका सबको नहीं मिलता है। मन आडम्बर कर के चला भी जा सकता है। कल्पना में जो गया वो विस्तार ही कर बैठेगा। नजरिया सबका अपना अपना है। मन के हारे हर मन के जीते जित होता है। स्वाबलंबन ज्ञान बढ़ाएगा। कर्महीनता आडम्बर रचेगा। समझ वही जो समझ सके तो ज्ञानी नहीं तो बाकि सब समझते है।     

जीवन (Life) को कैसे देखते हैं? जीवन की मुख्य मात्रा क्या हैं? जीवन को सबसे पहले ज्ञान (Knowledge) के माध्यम से समझना चाहिए

जिंदगी (Life)

जन्म से मृतु तक समय को जीवन (Life) कहते है 

बचपन में हस खेल कर बच्चे पढाई लिखाई करके मस्ती सरारत करते हुए रहते है। अपना जीवन बिताते हुए आगे बढ़ते है। किशोरावस्था में सही, गलत, अच्छा, बुरा सब प्रकार के ज्ञान को समझते हुए आगे बढ़ते है। शिक्षा प्राप्त करते है। जीवन के रंग को समझते है। जिंदगी में आगे बढ़ाते है। युवावस्था में जीवन के जिम्मेवारी को समझते है। घर परिवार के देख रेख, काम काज, लोग समाज में उठना बैठना सब प्रकार के ज्ञान और शिक्षा प्राप्त करते है। अपने जीवन के साथ जीवन संगिनी को प्राप्त कर के साथ साथ जीवन बिताते है। नए पीढ़ी के साथ आगे बढ़ते है। प्रौढ़ावस्था में जीवन के उतर चढ़ाव को समझते है। अपने अग्रज को अपने ज्ञान और अनुभव से शिक्षा देते है। समाज घर परिवार के देख रेख करते है। जीवन ब्यतित करते हुए आगे बढ़ते है। वृद्धावस्था में सब प्रकार के दुःख सुख का अनुभव करते है। एक एक कर के अपने ज्ञान और अनुभव को दूसरो को देकर अपने जीवन के समापन की और बढ़ते है। बाद में मृतु को प्राप्त करते है। इस तरह से जन्म से मृतु तक जीवन ब्यतित होता है।    

 

 

आप जीवन (Life) को कैसे देखते हैं?

जीवन को सबसे पहले ज्ञान के माध्यम से समझना चाहिए। जीवन का सबसे बड़ा मूल्य शिक्षा और ज्ञान ही होता है। जिसपर जीवन का विकाश तरक्की उन्नति आधारित होता है। जीवन में शिक्षा और ज्ञान यदि भरा हुआ है तो सफलता उससे कभी दूर नहीं रहेगा। समझदारी जीवन में लोगो के बिच में कार्य ब्यवस्था में अनुभव को दर्शाता है। सरलता सहजता जीवन में सुख दुःख के समय अपने जीवन को किस तरह ब्यतित करते है। मुस्किल के समय और हार्स उल्लास में जीवन को सहज और सजग कैसे रखना है। बहूत ही उपयोगी गुण दर्शाता है। जीवन में अपने कार्य ब्यवस्था के तरफ  सक्रियता जिम्मेवारी को दर्शाता है। घर परिवार बच्चो बुजुर्गो के प्रति जिम्मेवारी बहूत जरूरी है। मनुष्य के जीवन के लिए, सदाचार सद्भाव जीवन के संरचना में बहूत अहेमियत रखता है।       

 

जीवन (Life) की मुख्य मात्रा क्या हैं?

जीवन के मुख्य मात्र १० प्रतिशत ही होते है। आध्यात्मिक ज्ञान के अनुसार मनुष्य सक्रीय चेतन मन १० प्रतिशत होते है। बाकि ९० प्रतिशत अचेतन होते है। सचेतन मन की सक्रियता जीवन के लिए विकाश और सफलता का कारण है। इसलिए जीवन की मुख्य मात्रा १० प्रतिशत सक्रिय मन हैं।

जिंदगी (Life) जीवन के मुख्य गुण क्या हैं? जीवन के मुख्या गुण सरलता सहजता एकाग्रता संतुलित सोच समझ

जिंदगी (Life)

जीवन के मुख्य गुण क्या हैं?

जीवन के मुख्या गुण सरलता, सहजता, एकाग्रता, संतुलित सोच समझ, विवेक बुध्दी पूर्ण कार्य और कर्तब्य, सौम्यता, करुना, जरूरी कल्पना, शांति, बौद्धिक, चंचलता, अपने कार्य में गतिमान, गतिशीलता, निर्भीक, संतुलन, अमीरी, गरीबी, सुख, दुःख, अपनापन, कोमलता, सम्मानित, जानकर, ज्ञानी, निर्मलता, गंभीरता ऐसे बहूत से सकारात्मक गुण है।

जीवन के गुण में नकारात्मक गुण भी होते है कठोरता, निर्ममता, संकुचितपना, निर्दैता, निष्ठुरता, दरिद्रता, असहज, असंतुलित सोच समझ, विवेकहीनता, बुध्दिहीन, मतलावी, मन की कल्पनो में डूबना, कर्म हीनता।  

क्या पिछले जन्म (Past life) मृत्यु तिथि और वर्तमान जन्म जन्म तिथि के बीच कोई संबंध है?

अभी तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं है। जो की इस बात को प्रमाणित करे की क्या पिछले जन्म मृत्यु तिथि और वर्तमान जन्म तिथि के बीच कोई संबंध है। कई जगह देखा गया है। पुनर्जन्म कही भी ऐसा प्रमाण नहीं मिला है।

Monday, August 23, 2021

ज्ञान (Knowledge) समानार्थी शब्द गुण अर्थ वास्तविकता से परिचय ज्ञान का उच्चारण ज्ञान प्रश्न के उठाते भाव

ज्ञान (Knowledge) हिंदी में जानकारी 

जिससे कोई अनुभव हो जो जीवन में उठने वाले सवाल का जवाब मिलता हो।  हिंदी का महत्व भाषा से है। भारत देश का भाषा मुख्या तौर पर हिंदी में बोला जाता है ज्ञान गुण हैज्ञान के तरफ भागना सक्रियता है भाषा हिंदी बोलचाल की भाषा है। 

 

ज्ञान (Knowledge) प्रश्न के उठाते भाव 

ज्ञान प्रश्न के उठाते भाव का जवाब ज्ञान के माध्यम से मिल जाता है समय समय पे उठाने वाले हर सवाल का हल ज्ञान से ही हो सकता है इसलिए ज्ञान बहूत जरूरी है। 

 

ज्ञान (Knowledge) समानार्थी शब्द 

गुण, बिद्य, शिक्षण, शिक्षा, अध्ययन, पांडित्य, परिचय, विद्वता, विवेक, आत्मज्ञान, पढाई, लिखाई, अच्छा बोलना, अच्छा सुनना, अच्छाई, समझदारी, सहज भाव, समभाव, बुध्दी, भाव, आध्यात्म। 

 

ज्ञान (Knowledge) अर्थ 

वास्तविकता से परिचय जो जीवन में जरूरी है. अच्छा क्या है? बुरा क्या है? एक एक भाव का अनुभव जो अच्छाई का प्रतिक हो। उस तरफ अपने रस्ते को मोड़ लेना हर संभव वास्तविकता को समझते हुए आगे बढ़ना। 

 

ज्ञान (Knowledge) क्या है? 

पीडीफ़ ज्ञान एक अनुभव है।  पीडीफ़ एक कंप्यूटर के एक संसकरण है। जिसमे एक समूह के चित्र या पंक्ति लिखावट को एक कर के जोड़ दिया जाता है कंप्यूटर उसको पीडीफ़  में एक साथ एक पेज में सब बारी बारी से दिखता है या जो जरूरी है। उसे पेज के माध्यम से देख सकते है वैसे ही जीवन के पीडीफ़ में ज्ञान में अछे शब्द और अच्छा ज्ञान संग्रह होना चाहिए जिस ज्ञान का जरूरत हैउसके अनुसार उस ज्ञान को समझ कर उपयोग करना चाहिए। 

 

ज्ञान (Knowledge) का उच्चारण कैसे करें? 

सहज भाव से, नम्रता से, आदर से, ध्यान से, ख़ुशी से, प्रसन्नता से उच्चारण करे। 

Complete microscope knowledge guide explaining types, uses, parts, working principles, benefits, and applications in science, medicine, and research.

Complete Microscope Knowledge Guide | Types, Uses & Benefits

A microscope is one of the most important scientific instruments ever invented. It allows humans to see objects that are too small to be observed with the naked eye. From medical research and education to industrial inspection and forensic science, microscopes play a crucial role in understanding the micro-world. This complete microscope knowledge guide explains the definition, history, types, uses, working principles, and benefits of microscopes in detail.


What Is a Microscope?

A microscope is an optical or electronic instrument designed to magnify extremely small objects such as cells, bacteria, tissues, crystals, or micro-components. By using lenses, light, or electron beams, a microscope produces enlarged images that reveal fine details invisible to the human eye.

The word microscope comes from two Greek words:

  • Mikros – small

  • Skopein – to see


History of the Microscope

The invention of the microscope dates back to the late 16th century. Early versions were simple magnifying devices made with glass lenses. Over time, technological advancements led to powerful optical, electron, and digital microscopes.

Microscopes revolutionized biology and medicine by enabling the discovery of cells, microorganisms, and complex tissue structures. Today, modern microscopes can magnify objects millions of times with extraordinary clarity.


Main Parts of a Microscope

Although designs vary, most microscopes include these basic components:

  • Eyepiece (Ocular Lens): Used to view the image

  • Objective Lenses: Provide different levels of magnification

  • Stage: Holds the slide or specimen

  • Light Source: Illuminates the specimen

  • Condenser: Focuses light onto the specimen

  • Focus Knobs: Adjust sharpness and clarity

  • Arm and Base: Provide support and stability


How Does a Microscope Work?

A microscope works by bending light or directing electron beams through lenses to magnify an object. In optical microscopes, light passes through the specimen and is refracted by lenses, producing a magnified image. In electron microscopes, electrons replace light, allowing much higher magnification and resolution.


Types of Microscopes1. Simple Microscope

A simple microscope uses a single lens for magnification, like a magnifying glass. It is mainly used for basic observation and educational purposes.

2. Compound Microscope

This is the most commonly used laboratory microscope. It uses multiple lenses (objective and eyepiece) and provides magnification from 40× to 1000×. It is widely used in schools, colleges, and medical laboratories.

3. Stereo Microscope

Also known as a dissecting microscope, it provides a three-dimensional view of specimens. It is used for examining insects, circuit boards, and small mechanical parts.

4. Digital Microscope

A digital microscope displays images on a screen or computer instead of an eyepiece. It allows image capture, video recording, and easy sharing for research and teaching.

5. Phase Contrast Microscope

This microscope enhances contrast in transparent specimens without staining. It is especially useful for studying living cells.


Electron Microscopes

Electron microscopes use electron beams instead of light, offering extremely high magnification and resolution.

1. Transmission Electron Microscope (TEM)

TEM passes electrons through thin specimens to reveal internal structures at the atomic level.

2. Scanning Electron Microscope (SEM)

SEM scans the surface of specimens to produce detailed three-dimensional images. It is widely used in material science and engineering.


Uses of a Microscope

Microscopes are used across many fields:

1. Medical and Healthcare

  • Diagnosis of diseases

  • Blood tests and pathology

  • Studying bacteria and viruses

2. Education

  • Teaching biology and science concepts

  • Practical laboratory experiments

3. Scientific Research

  • Cell biology and genetics

  • Nanotechnology research

4. Industrial Applications

  • Quality control

  • Microchip and circuit inspection

5. Forensic Science

  • Analyzing fibers, hair, and fingerprints


Benefits of Using a Microscope

  • Enhanced Vision: Reveals microscopic details

  • Scientific Discovery: Enables new research findings

  • Medical Accuracy: Improves disease diagnosis

  • Educational Value: Makes learning interactive

  • Technological Advancement: Supports innovation in science and industry


Advantages and Limitations

Advantages

  • High magnification and precision

  • Wide range of applications

  • Essential tool in science and medicine

Limitations

  • High-end microscopes can be expensive

  • Requires proper training

  • Sample preparation may be time-consuming


Future of Microscopes

Modern microscopes are becoming smarter with artificial intelligence, automation, and digital imaging. Advanced microscopes can now analyze samples automatically, improve resolution, and provide real-time data, making them even more powerful tools for the future.


Conclusion

Microscopes have transformed the way humans understand the microscopic world. From basic education to advanced scientific research, they are indispensable instruments. By learning about microscope types, uses, and benefits, students and professionals can better appreciate their importance in science, medicine, and technology.

This Complete Microscope Knowledge Guide provides a strong foundation for anyone interested in understanding how microscopes work and why they are essential in today’s world.

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