आपत्ति और विपत्ति मे संचित धन ही काम आता है

आपत्ति और विपत्ति मे संचित धन ही काम आता है।

अमीरों को ये नहीं भूलना चाहिए की धन मे चंचलता होता है।

वो कभी भी समाप्त हो सकता है।

जीवन के निर्वाह मे संतुलन के लिए और भविष्य के लिए धन का संचय और रक्षा बहूत जरूरी है।

माना की वर्तमान समय अपना अच्छा चल रहा है।

पर ये कभी भी नहीं भूलना चाहिए की समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता है।

समय मे उतार चढ़ाओ आते ही रहते है।

आज अपना समय ठीक है पर भविष्य मे अपना समय कैसा होगा ये कोई नहीं कह सकता है।

इन सभी प्रकार के मुसीबत से बचने के लिए वर्तमान मे कमाए धन मे से थोड़ा धन भविष्य मे लिए बचाकर रखना चाहिए।

जिससे आगे के समय मे किसी भी प्रकार के आर्थिस तंगी का सामना नहीं करना पड़े

 

धनवान व्यक्ति कहता है की मेरे पास धन संचित है। मुझे कभी मुसीबत पड़ ही नहीं सकता है।

वास्तव मे ऐसा नहीं होता है।

धनी व्यक्ति के पास धन होने के साथ साथ उनके खर्चे भी उतने ही होते है।

एक साधारण व्यक्ति के पास बहूत मुसकिल आज के समय मे अपना घर होता है।

जिसमे वो अपना गुजर बसर करता है। जब की धनवान व्यक्ति के आने वाले आमदनी के साथ खर्चे भी होते है। जिसमे निरंतर खर्च होता रहता है।

आलीशान घर मे बिजली बत्ती सजावट रहने के तरीके मे दिन प्रति दिन बढ़ोतरी  होता रहता है।

जिसे धन के द्वारा ही अर्जित किया जाता है।

समय के बदलाओ के साथ आने वाले आमदनी मे कमी के संभावना से ये सभी आलीशान जौर जरूरत की चिजे को प्राप्त करने मे दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

तब अपने जरूरतों को पूरा करने के लिए संचित धन भी खर्च होने लग जाएंगे और अंत मे मुसीबत आना तय है।

मनुष्य को कभी भी नहीं भूलना चाहिए की धन मे चंचलता होता है।

धन की प्रकृति इस्थिर नहीं रहता है। धन आना जाना लगा रहता है।

आज एक के पास तो कल दूसरे के पास आता जाता रहता है।

आर्थिक दृस्टी से कभी समय अच्छा तो कभी समय बुरा होता है।

चाहे जितना भी धन कमा ले फिर भी समय से उम्मीद नहीं कर सकते है की अपना आगे का समय वर्तमान के जैसा हो।

हो सके तो वर्तमान मे कमाए धन मे से थोड़ा धन भविष्य के लिए जरूर बचाकर रखना चाहिए।

कई बार तो ऐसा भी देखा गया है की भविष्य के लिए बचाए धन भी खर्च हो कर समाप्त हो जाते है।

मुसीबर कब किसपर आ जाए ये कोई नहीं जनता है।

धन की चंचलता और बेबुनियाद खर्च एक न एक दिन संचित धन को समाप्त कर देता है।

संचित धन
संचित धन

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